Wednesday, 29 July 2009

क्या देह के दम पर नारी पुरुषों को चुनौती दे रही है?

घुंघट के साथ नारी ने आज दुपट्टा भी उतर फेंका है! उसे दुपट्टा बेकार का झंझट लगाने लगा है! स्वतंत्रता की आड़ में नारी को नग्न कराने का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है! स्कूल, कालेज, चोराहे, बाजार, यहां तक कि मंदिर और पूजा स्थलों पर भी अब बड़ी संख्या में भड़काऊ और अर्ध नग्न कपडे पहने आधुनिक नारियों का देखा जाना आम हो गया है! ऐसे में सवाल ये है कि क्या आपका सर उस वक्त शर्म से झुक जाता है जब मन्दिर और पूजा स्थलों में अर्ध नग्न कपडे पहने या अंग प्रदर्शन करते लड़कियों को आप देखते हैं? क्या कोई नारी इस बात का जवाब दे सकती है कि आज हर जगह नारी अंग प्रदर्शन क्यों कर रही है? कहीं पुरुषों से प्रतिस्पर्धा में जितने के लिए नारी अपने शरीर को हथियार कि तरह तो इस्तेमाल नहीं कर रही है? और ऐसा है? तो क्या नारी सही कर रही है? क्या Deh के dam पर नारी पुरुषों को chunauti दे रही है?

9 comments:

Anonymous said...

http://timesofindia.indiatimes.com/NEWS/India/Teacher-disrobes-girls-takes-measurements-with-his-fingers/articleshow/4833773.cms

this is the reply mr gulati see the truth for your ownself and u will realise why woman are becoming less conmscious of their bodies and its good because if one woman gets disrespected bedause of her body to hell with the body

मोहिन्दर कुमार said...

ऐसा कब नहीं हुआ है... उस युग का नाम बता सकते हैं क्या आप ?

cmpershad said...

" नारी को नग्न कराने का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है"...कौन कर रहा है भाई?

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बिना सोचे विचारे और आँख बन्द करके पाश्चात्य के अन्धानुकरण का नतीजा है ये!!

अनिल कान्त : said...

सिर्फ नारी पर ही क्यूँ ऊँगली उठाते हैं लोग ... दोस्ताना फिल्म में 'जॉन अब्राहम' ने जो किया वो किसी से छुपा नहीं है...नहीं देखी हो तो देख लीजिये

सलीम खान said...

आजकल फिल्मों में तो लड़कियां (Actresses) उधम करे ही हुए हैं मगर हमारे लोकल समाज में भी अब छोटे कपडे आम होते जा रहे हैं, मुझे तो ऐसा लगता है कि हर गर्मी में लड़कियां पश्चिमी सभ्यता के नज़दीक और करीब आती जा रही हैं और उनके वस्त्रों में अमेरिका और यूरोप की झलक हर गर्मी में बढती ही जा रही है यानि कम के कमतर और कमेस्ट ! हमें नहीं लगता कि यह बीमारी किसी तरह जल्दी ठीक हो पाए लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि अगर हम अपनी ओरिजनल सभ्यता और चलन को अपनाने लगे तो कुछ फायेदा हो सकता है | उन चलन में से एक चलन है- पर्दा !!!

सलीम खान said...

वैसे मैं आपको एक उदहारण से यह बताने की कोशिश करूँगा कि पर्दा करने वाली लड़की और छोटे वस्त्र वाली लड़की में से कौन दुर्व्यवहार को न्योता देगी !!!

"मान लीजिये समान रूप से सुन्दर दो जुड़वां बहनें सड़क पर चल रही हैं| एक केवल कलाई और चेहरे को छोड़ कर परदे में पूरी तरह ढकी हों दूसरी पश्चिमी वस्त्र मिनी स्कर्ट (छोटा लहंगा) और छोटा सा टॉप पहने हो | एक लफंगा किसी लड़की को छेड़ने के लिए किनारे खडा हो ऐसी स्थिति में वह किस लड़की से छेड़ छाड़ करेगा ? उस लड़की से जो परदे में है या उससे जो मिनी स्कर्ट में है? स्वाभाविक है वह दूसरी लड़की से दुर्व्यवहार करेगा! ऐसे वस्त्र विपरीत लिंग को अप्रत्यक्ष रूप से छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार का निमंत्रण देते हैं|'

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सलीम खान said...

"उस क्षण जब एक व्यक्ति की नज़र किसी स्त्री पर पड़े तो उसे चाहिए कि वह अपनी नज़र नीची कर ले |"


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focus said...

kya bhai...doodh ke jale hain kya...

aapki is article me kai vartni se sambandhit ashudhiayan hain..kya BHASHA se copy kiya hai?