Monday, 31 May 2010

लिव इन, प्यार या व्याभिचार?: दिल्ली से योगेश गुलाटी

जेट एयरवेज़ की एक एयरहोस्टेस ने अपने साथी पायलेट के खिलाफ रेप का मामला दर्ज करवाया है! जिसके बाद महिला के साथी पायलेट को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया! 22 वर्षीय एयरहोस्टेस 27 साल के पायलेट के साथ लिव इन रिलेशशिप में 2009 से रह रही थी! एयरहोस्टेस ने आरोप लगाया है कि उसके साथी पायलेट ने उसे शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में वो मुकर गया! इससे एक बात उभर कर सामने आयी है कि महानगरों में लिव इन का प्रचलन बढ रहा है! सवाल ये है कि हमारे आधुनिक कहे जाने वाले युवा लिव इन का खुल कर समर्थन करते हैं! वो कहते हैं अगर दो प्यार करने वाले साथ रहना चाहते हैं तो इसमें बुराई क्या है! हैरानी की बात ये है कि लडकियां भी ऎसे तर्कों के मामले में पीछे नहीं हैं! लेकिन सवाल ये है पहले शादी के बिना साथ रहने का फैसला करते हो, बाद में शादी की ही बात पर अलगाव करते हो? अगर शादी ही करनी थी तो शादी करके साथ क्यों नहीं रहे सम्मान के साथ? पहले लिव - इन में रहते हो बाद में शादी की बात करते हो? शादी का इरादा था तो लिव - इन में क्यों रहे?

लिव -इन और शादी दोनों ही दो अलग - अलग मुद्दे हैं! हमारे कानून ने युवाओं को पूरी आज़ादी दे रखी है! और दो लोगों के मर्ज़ी से साथ रहने पर कानूनन कोई बंदिश नहीं है! लेकिन शादी में जहां ज़िम्मेदारी जुड जाती है, वहीं लिव - इन में ज़िम्मेदारी जैसी कोई बात नहीं होती! और आप कानूनी तौर पर अपने पार्टनर को किसी बात के लिये बाध्य नहीं कर सकते! आमतौर पर लिव- इन में रहने के बाद लडकियां अपने पार्टनर पर शादी के लिये दबव डालने लगती हैं! और जब वो शादी से इन्कार कर देता है तो चुंकि उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं होता इसलिये वो प्रतिशोध में अपने उसी साथी पर जिसके साथ वो अपनी मर्ज़ी से रह रही थीं रेप का केस कर जेल भिजवा देती हैं!

लिव - इन प्यार है, इसके समर्थन में तर्क देने वाले महापुरुषों की लंबी फेहरिस्त है! लेकिन मुझे समझ नहीं आता अगर ये प्यार है तो व्याभिचार क्या है? हमारे युवाओं का एक वर्ग अति आधुनिक होने का दावा करता है! इसमें अधिकांश वे लोग हैं जो छोटे कस्बों में पले बढे हैं और अब नौकरी या शिक्षा के लिये महानगरों में रह रहे हैं! ऎसे में वो खुद को एक आज़ाद पंछी की तरह समझने लगते हैं! जो पिंजरे से अभी - अभी मुक्त हुआ हो! ये अपनी ज़िंदगी को खुल कर जीना चाहते हैं! और अपनी आज़ादी का भरपूर फायदा उठाना चाहते हैं! इसलिए इन्हें लिव इन से भी परहेज़ नहीं और खुल कर उसका समर्थन करते हैं! लेकिन कुछ समय बाद शादी के मुद्दे पर अलगाव सामने आ जाता है! और फिर वही सवाल उठता है कि अगर शादी ही करनी थी तो लिव - इन की क्या ज़रूरत थी? और अगर लिव - इन प्यार है तो व्याभिचार क्या है?

11 comments:

रचना said...

मुद्दा भटकना कोई आप जैसो से सीखे । शादी का झांसा दे कर पहले भी लडके लड़कियों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाते थे । गर्भ रह जाने पर लड़की पर ही दोष रोपण होता था और समाज भी उसी को दोष देता था । अब शिक्षित हो जाने से लड़कियों ये समझ गयी हैं शादी कि बात पर शारीरिक सम्बन्ध बना कर शादी ना करना अपराध हैं और रेप मे दर्ज होता हैं कानून भी यही मानता हैं कि आपसी सहमति का मतलब अपनी जिम्मेदारी से भागना नहीं होता हैं । अब भी पुरुष वर्ग चेत जाये तो अच्छा हैं वरना आने वाले समय मे देखिये और कितने इस तरह के अपराधो मे जेल जाते हैं

ललित शर्मा said...

लिव इन रिलेशनशिप में शादी भी होती है क्या?
हमने तो आज तक यही पढा है कि शादी से बचने के लिए लिव इन रिलेशनशिप होती है।
हाँ अभी तक देखा नहीं है रहते हुए या कोई हमें मिला नहीं लिव इन रिलेशनशिप वाला जोड़ा।
हमारे देहात में आर या पार-भले हो जाए बंटाढार

दीपक 'मशाल' said...

योगेश जी सहमत हूँ आपसे.. यहाँ भी टिप्पणी के रूप में लोगों की एकतरफा सोच देख कर दुःख हुआ.. समझ नहीं आता हर जगह गर्भ धारण की समस्या अपने आप कैसे पैदा हो जाती है? यहाँ तो गर्भधारण की बात हुई ही नहीं.. वो लड़की भी बालिग होने के बाद ही इस रिलेशन में आयी होगी, ना कि अनजाने में.. उसे भी पता होगा कि ये सब शादी से पहले ठीक नहीं(यदि वो शादी संस्था में विश्वास रखती होगी तो) और अगर उसे विश्वास ही नहीं होगा तो अब शादी की बात करने का क्या फ़ायदा. या तो ऐसे लोग पूरी तरह से ही पश्चिमी सभ्यता को अपना लें या फिर ऐसा ना करें कि २-३ साल पश्चिमी शैली अपनाने के बाद भारतीय सभ्यता को सही मानने लगें. मर्यादा का ख्याल दोनों तरफ से रखा जाना चाहिए.. पुरुष को भी और नारी को भी.

honesty project democracy said...

दिमागी दिवालियापन ,समाज में अनुभव व बड़ों को महत्व न मिलना और जीने के लिए पेट भरने की मजबूरी से ही इस लिव इन का जन्म हुआ है जिसे भ्रष्ट नेताओं ने बढ़ाने का काम किया है ,क्योकि ऐसे ख्यालात नेताओं के भ्रष्टाचार को बढ़ने में और उसकी सुरक्षा में महत्वपूर्ण रोल अदा करता है ,शर्मनाक है ये और इंसानी मर्यादा के खिलाप है ,वैसे लोगों के अपने-अपने तर्क और कुतर्क हो सकतें है ,उसका तो क्या कहना !

Yogesh Gulati said...

आपका गुस्सा जायज़ है रचना जी! लेकिन मैं मुद्दे से नहीं भटका हूं! खुशी होती अगर आपका जोर ऎसे व्यक्तियों को जेल भेजने की बजाय लडकियों को ऎसी मूर्खता करने से बचाने पर होता! अव्वल तो कानून में बहुत पेंच हैं और कानून इस मामले में स्पष्ट कुछ नहीं कहता! यहां खुले - आम रेप के आरोपी तो छूट जाते हैं और आप ऎसे संबंधों में आरोपी को जेल भेजने की बात कर रही हैं! दूसरी बात अगर ऎसे लोगों को चंद सालों की सज़ा हो भी जाती है तो पीडित लडाकी लंबी लडाई और अपमान के बाद बस इस बात पर खुश होने के सिवाय कुछ नहीं कर सकती कि उसने अपने प्रेमी को सज़ा दिला ही दी! लेकिन यहां सबसे बडा सवाल ये है कि लडाकियों को ऎसी रिलेशनशिप में पडने की ज़रूरत ही क्यों पडती है? क्या आकर्षण उनकी अक्ल पर पर्दा डाल देता है? क्योंकि मैं दावे के साथ कह सकता हूं, कि प्यार तो ये होता नहीं! प्रेम एक बहुत ही पवित्र चीज़ है लेकिन ये बिरले ही देखने को मिलता है! ऎसे रिश्तों को प्रेम का नाम देना प्रेम की तौहीन होगा!
आप के और मेरे नज़रिये में सिर्फ इतना ही अंतर है कि आप बीमारी को देख रही हैं और मैं बीमारी के कारण को! मेरा सीधा सा सवाल है कि शादी से पहले लडाकियों को ऎसे संबंध बनाने की ज़रूरत क्यों पडती है?
दीपक जी ने अपनी टिप्पणी में अच्छी बात कही है कि "कल्चरल कन्फ्यूज़न" में जीने की वजह से पहले ऎसे लोग अपनी संस्कृिति से बगावत करते हैं और बाद में जब वो दोराहे पर आजाते हैं तब उन्हें एहसास होता है कि उन्हें रहना तो इसी समाज में है इसीलिये उन्हीं पराओँ की दुहाई देने लगते हैं जिनसे उन्होंने बगावत की थी!

Anonymous said...

बिल्कुल इज सही बोला जी! ए लड्खैऎ ळौग का प्रोब्लम अपुन को अजल तलक समझ नही आया! पहले अपनी मर्जी से सब काम करेगा फिर फालतू फोलतू फोकट शोर मचायेगा!

Anonymous said...

मेरी गर्ल फ्रेंड भी मुझे जेल भिजवाने की धम्की दे रही है, जब्कि उसकी मर्ज़ी से ही ये रिलेशन्शिप शुरु हुइ थी! और उसने कहा था कि उस्का शादी का कोई इरादा नही है! लेकिन अब वो कह्ती है कि शादी करो नहीम तो जेल भिजवा दूगी! बताइये मै क्या करुं?

Anonymous said...

भगवान बचाये आज कल की लडकियों से......

राजदीप said...

सच कहा भाई

जया said...

"कल्चरल कन्फ्यूज़न" में जीने की वजह से पहले ऎसे लोग अपनी संस्कृिति से बगावत करते हैं और बाद में जब वो दोराहे पर आजाते हैं तब उन्हें एहसास होता है कि उन्हें रहना तो इसी समाज में है इसीलिये उन्हीं पराओँ की दुहाई देने लगते हैं जिनसे उन्होंने बगावत की थी!
धार है आपकी कलम में....

रचना said...

Perhaps you did not understand my comment

I merely was saying that with education girls have become more knowledgeable about their rights so man should take care or more will fall into trap
times have changed girls know where they can use the law to thier benefit and most of them dont really bother about norms of society any more